जमशेदपुर के ‘पार्सल चाचा’


जमशेदपुर: जुगसलाई महतो पाडा रोड पुरानी बस्ती में रहेने वाले 65  वर्षीय मो अयूब जिनको सारा शहर ” पार्सल चाचा” के नाम से जानता है , वे शहर के मुख्य डाकघर बिष्टुपुर में मुख्य सड़क के किनारे पेड़ के नीचे पार्सल पैकिंग का काम पिछले 25 सालो से करते हुऐ आ रहे है  , पार्सल पैकिंग के जुगाड़ के लिए इनके पास पैक करने वाला सफ़ेद कपडा , पार्सल को सील करने के लिए लाह की छोटी से डंडी , पार्सल को सील करने वाली मोहर के साथ अपने काम में मस्त रहेने वाले अयूब चाचा ने बतया  परिवार में 2 भाई माँ पिता के साथ रहेने वाले चाचा जब बेरोजगार थे पिता की कमी से घर बहुत मुस्किल से चल पाता था , बड़े भाई के मरने के बाद इन्होने ने पार्सल पैकिंग में हाथ आज़माना शुरू किया , शुरुवात में १ या  २ पार्सल हे पैक करवाने के लिए ग्राहक आते थे   धीरे-धीरे उनकी पैकिंग को पहचान मिली. वह इतने मशहूर हैं  शहर के 13 डाकघरों से  लोग पार्सल पैकिंग करवाने अयूब चाचा के पास आते है ,                                 पैकेजिंग की फिनिशिंग ऐसी कि हर ग्राहक संतुष्ट ,३५ वर्ष की उम्र में इन का निकाह गुलशन आरा से हुआ , परिवार में १ लड़का और १ लड़की जिस की शाद्दी हो चुकी है 

      

                                                                  

 स्टैंड अप इंडिया का सपना  २५ वर्ष पहले ही  देखने वाले पार्सल चाचा आज दो जून की रोटी को मोहताज़ है , चाचा  ने बतया की अब इस बदलते दौर में  बहुत मुश्किल से पार्सल करवाने लोग आते है, कभी कभी तो बिना कमाए घर भी जाना पड़ता है, इस ढलती उम्र  के साथ आँखों की रौशनी ने भी ज़वाब दे दिया है , फिर मेरा ज़स्बा और जोश कम नहीं हुआ है, कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता , बस लोगो के नज़रिए में फर्क होता है  

रिपोर्ट – अम्बाती रोहित 

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