इंडियन सुपरहीरो “शक्तिमान” देखने वाली पीढ़ी की अनोखी यादें


काश, हमारे पास टाइम मशीन होती और हम उसमें यात्रा कर अपने अतीत और भविष्य के अनसुलझे रहस्यों को जान पाते, ऐसी अपेक्षा सबकी होती है, आने वाले समय में हो सकता है कि विज्ञान इतनी तरक्की कर ले। बहरहाल आइये आपको ले चलते है, अभी से तकरीबन 20 साल पहले। 

सितंबर 1997, वह दौर जब हम भारतीयों को मिला था बच्चों का अपना इंडियन सुपरहीरो – “शक्तिमान” । हर हफ्ते अपने पसंदीदा सुपरहीरो को देखने का इंतज़ार करना, शनिवार सुबह 11:30 बजे स्कूल में होने की वजह से शक्तिमान को मिस करना, घर आकर आज क्या हुआ, यह जानने का प्रयास करना, फिर मंगलवार रात को होनेवाले रिपीट टेलीकास्ट का इंतज़ार करना। फिर समय बदलने पर हर सप्ताह रविवार दोपहर 12 बजे का बेसब्री से इंतजार करना, आने वाले एपिसोड की कहानियों के बारे में गहराई सोचना, की पता नहीं अब क्या होगा। इन सब भावनाओं को हममें से हर कोई बखूबी महसूस कर सकता है, जो 1980, 1990 के दशक से हो। दूरदर्शन पर शक्तिमान के प्रसारण के समय खेल के मैदानों, सड़कों पर ठीक वैसी कि चुप्पी होती थी, जैसा अक्सर महत्वपूर्ण क्रिकेट मुकाबलों  के दौरान होता है, सभी के सभी बच्चे टीवी स्क्रीन के पास मिलते थे। 

अंधेरे को कायम रखने के प्रवर्तक तमराज किलविष के नुमाइन्दो का मानवता पर कहर ढाना, और फिर हर बार शक्तिमान का आना, अंधेरे को हराना। यह बाल मान में एक अलग ही रोमांच पैदा करता था, और हम बच्चों में “सत्य की ही विजय होगी” भावना को भरता था। तमराज किलविष, डॉ0 जैकल, कपाला, किटाणु मैन, प्लास्टिका, केकड़ा मैन, कष्टक, स्टोनमैन, इनविजिबल मैन, क्लोन शक्तिमान जैसे अनगिनत सुपर विलेन्स, जिनसे शक्तिमान का जूझना, समाज को बचाने के लिए जान लगा देना, और विलेन्स को हराकर रोचक घटनाक्रम के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश को लगातार देना। शक्तिमान का हर एपिसोड बेहद ज्ञानवर्धक भी होता था, डॉ. जैकाल का बार-बार नए-नए अविष्कार कर शक्तिमान को हमेशा चुनौती देता रहता था, वही शक्तिमान कुंडलिनी शक्ति, योग, पंचतत्व व गुरु ज्ञान जैसी प्राचीन विज्ञान की बदौलत हमेशा मानवता को संकट से बचाने में सफल रहता था। 

शक्तिमान ने बच्चों की जिज्ञासा को बढ़ाया, उनमें आधुनिक समय में भी सामाजिक मूल्यों को तबज्जो देने, अपनी संस्कृति एवं भारतीय प्राचीन विज्ञान से जुडने को प्रेरित किया। वही विज्ञान गल्प जैसी कई स्थितियों को कहानी में जोड़ते हुये बच्चों में वैज्ञानिक सोच को भी बढ़ावा देने का कार्य किया। मैंने खुद ज्योति पुंज के माध्यम से समय यात्रा, रूहाक्षिणो के माध्यम से धरती से परे जीवन, क्लोन शक्तिमान एवं अन्य घटनाक्रमों के माध्यम से कृत्रिम उपग्रह एवं ब्रह्मांड के अनोखे रहस्यों जैसे अनछूये व उपयोगी जानकारियों से रूबरू हुआ था, जिससे हम शायद ही अपनी पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से जानने को प्रेरित होते। 

शक्तिमान टेलीविज़न के इतिहास में उन गिने चुने धारावाहिकों में से एक है, जिसने पीढ़ियों को गढ़ने में, उनमें सामाजिक मूल्यों को स्थापित करने, सही-गलत के प्रति बच्चों में समझ बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और आवश्यकता पढ़ने पर अपने दर्शकवर्ग बच्चों के मुताबिक खुद को बदला, जिससे उनपर कोई प्रतिकूल प्रभाव ना पड़े, इसके कई उदाहरण भी मौजूद है। 

शक्तिमान के प्रति बच्चों में इतना क्रेज था की क्या कहने, शनिवार सुबह कार्यक्रम आने के कारण कई बच्चे स्कूल से भागने की जुगत में रहते, इसके लिए शो को हर सप्ताह रविवार 12 बजे शुरू किया गया। जिससे बच्चों के स्कूली पढ़ाई में कोई बाधा ना आए। एक समय ऐसा भी आया, जब बच्चे शक्तिमान की तरह गोल-गोल घूमकर दुर्घटना के शिकार होने लगे, तब शो के दौरान विशेष तौर पर कंप्यूटर ग्राफिक्स, क्रोमा इत्यादि तकनीकों के बारे में शक्तिमान के गोल घूमने की सच्चाई को बताकर बच्चों को शक्तिमान की नकल ना करने के लिए प्रेरित किया गया। बच्चों ही नहीं बड़ों में भी, शक्तिमान के लिए एक विशेष भावना थी, सभी कार्यक्रम मे दिखाई गयी चीजों का अनुकरण करते थे, उसे आत्मसात करते थे। इसी क्रम में बच्चों मे अच्छी आदतों को विकसित करने हेतु शुरू किए गए कार्यक्रम के अंत में दिखाये जाने वाले खास सेगमेंट “छोटी मगर मोटी बातें” को भला कौन भूल सकता है। 

अपने जीवन के तीसरे दशक के करीब के लोगों की जिंदगी में शक्तिमान का एक अहम स्थान रहा है। अब शायद ही किसी फिक्शनल कैरेक्टर को अब दोबारा इतनी सफलता मिले। हम खुद को बेहद खुशनसीब मानते है की हम उस दौर से है, जब हमने दुनिया को बदलते देखा है, शक्तिमान को देखा है। शक्तिमान जैसे उत्कृष्ट धारावाहिक को मूर्त रूप में लाने में जमशेदपुर का अहम योगदान भी रहा है। अब जब बच्चों के चहेता अपना शक्तिमान, पीढ़ी-दर-पीढ़ियों के आदर्श भीष्म पितामह की भूमिका निभानेवाले श्री मुकेश खन्ना 22 दिसम्बर 2017 को हमारे अपने चहेते शहर जमशेदपुर में बच्चों से मुखातिब हो रहे है। यह हम सबके लिए बेहद गर्वान्वित, भावनात्मक व रोमांचित कर देने वाला अनुभव है। 

— तरुण कुमार (9470381724)

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