हिंदी दिवस विशेष : ​हिन्दी सीखे, हिन्दी सिखाये, हिन्दी के प्रसार में अपनी भूमिका निभाए


जमशेदपुर : जब भी हम कभी अपने भारत देश के प्रति गौरवान्वित महसूस करते है,  हमारे जुबान पर बस एक ही गीत आता है “सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा”, इसी गीत को आगे गुनगुनाते हुये हम गाते है “मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना, हिन्दी हैं हम वतन हैं, हिन्दोस्तां हमारा,” देशभक्ति के जज्बे से परिपूर्ण यह पंक्तियाँ भारतीय सभ्यता में हिन्दी भाषा के महत्वपूर्ण स्थान को खुद-व-खुद इंगित करती है। भारत की एकता, अखण्डता, सामाजिक-धार्मिक सौहार्द, आज़ादी सभी में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है।

 हिंदी हमारी अभिव्यक्ति की भाषा है, हिन्दी हमारी पहचान है, हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है, हिंदी हमारे दिल की आवाज है। लेकिन हम आज जिस आधुनिक समाज में रह रहे है, वहां एक तरह से कहा जाये तो आज हम हिंदी को उसका उचित सम्मान दिलाने में नाकाम हो रहे है। अब हिंदी की जगह अंग्रेजी जैसी विदेशी भाषा काबिलियत व योग्यता का पैमाना मानी जा रही है। फलस्वरूप, अभिभावक भी अपने बच्चों को हिंदी के बजाए अंग्रेजी विद्यालय में पढ़ाने के लिए एड़ी-चोटी एक कर रहे है। मानो हिन्दी माध्यम से पढ़ाई करना, बच्चों के भविष्य को संकट में डालने जैसा है। शिक्षा की खराब होती गुणवता और निजी विद्यालयों की दिनों-दिन बढ़ती संख्या में बलबती होती इस मानसिकता का बड़ा हाथ है। और तो और तकनीकी व उच्च शिक्षा भी हिन्दी माध्यम में आसानी से उपलब्ध नहीं है। गिने-चुने राज्यों में सरकारी काम-काज को छोड़कर दफ्तरों में भी हिन्दी का प्रयोग सीमित ही है। माहौल का तकाजा मानिए, अब गिने-चुने युवा ही हिन्दी पढ़ने को आगे आते है। अँग्रेजी जैसी अंतराष्ट्रीय भाषा जानना बुरा नहीं, लेकिन देश में इसका बढ़ता प्रभाव कम से कम हिन्दी के लिए खतरे की घंटी है। इस तरह तो संभवत: आने वाले समय में हिन्दी जानने वालों की संख्या भी कम ही होती जाएगी।

हिन्दी आज विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। अंतराष्ट्रीय एवं सामरिक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभुत्व के साथ-साथ हिन्दी का प्रसार भी इन दिनों बढ़ रहा है। विदेशों में भी लोगों के द्वारा हिन्दी सीखने के लिए आगे आने की खुशनुमा खबरें भी मिलती रहती है। हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी बहुत ही लचीली भाषा है, दूसरे भाषा के शब्द भी इसमें सहर्ष समाहित होते चले जाते है, ऐसी खासियत, ऐसा लचीलापन किसी दूसरे भाषा में शायद ही हो। हिन्दी भाषा में अपार संभावनाएँ है, आवश्यकता है देश-विदेश में रहने वाले हम सभी प्रवासी-अप्रवासी भारतीयों को अपनी मातृभाषा को उचित स्नेह देने का। राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी के प्रसार को बढ़ाने हेतु प्रयास जारी है। आवश्यकता है हम इसे सीखे, इसका सभी जगह बेहिचक उपयोग करे, तो हिन्दी भी विश्व की आर्थिक भाषा बन सकती है। 

जीवन के हर क्षेत्र में हम भारतीयों का प्रयास जिस तरह से रंग ला रहा है, पूरी आशा है कि आने वाला समय हिन्दी का स्वर्णिम दौर होगा। हम प्राकृतिक रूप से हिन्दीभाषी है, यह हमारे संस्कारों की भाषा है, यह हमारी अपनी भाषा है। कृप्या हिन्दी बोलने में आत्मविश्वास महसूस करे, हिन्दी साहित्यों को अपनी जीवनशैली में जगह दे। हिन्दी सीखे, हिन्दी सिखाये, हिन्दी के प्रसार में अपनी भूमिका निभाए। 

तरुण कुमार (9470381724)

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