जमशेदपुर का मोहन आहूजा बैडमिंटन स्टेडियम, सन् 1960 से 2017


झारखण्ड बैडमिंटन का मक्का मोहन अहूजा इंडोर स्टेडियम, बैडमिंटन खिलाड़ियों और प्रेमियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। 1960 में स्थापित इस इंडोर स्टेडियम के बारे में शायद हमारे शहरवासी ज़्यादा नहीं जानते। इसलिए आज हम आपको बताएंगे इस स्टेडियम की वो ख़ास बातें, जो आप नहीं जानते।

written & compiled by shweta modi

स्थापना : –

इसकी स्थापना 1960 में टाटा स्टील द्वारा की गई थी। दरअसल टाटा स्टील ने उस वक़्त के बिहार बैडमिंटन एसोसिएशन और आज के झारखण्ड बैडमिंटन एसोसिएशन को एक रुपए वार्षिक सब लीज़ पर जगह मुहैया करवाई थी। जिसके बाद से जेआरडी के पीछे नॉर्थन टाउन में यह स्टेडियम बरकरार है और नित नए खिलाड़ी, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर दे रहा है। साल 2000 में झारखण्ड के अस्तित्व में आने के बाद से यह झारखण्ड बैडमिंटन एसोसिएशन हो चला है। टाटा स्टील और मोहन अहूजा इंडोर स्टेडियम के बीच 1960 के बाद साल 2012 में इस लीज़ की अवधि पांच सालों के लिए बढ़ा दी गयी थी।जिसकी अवधि 31 दिसम्बर 2017 में खत्म हुई। इस अवधि के ख़त्म होते-होते नया विवाद शुरू हो गया।

स्टेडियम के नाम की कहानी : –

आपके मन में यक़ीनन यह सवाल उठा होगा कि आख़िर इस स्टेडियम का नाम मोहन अहूजा इंडोर बैडमिंटन स्टेडियम क्यों पड़ा? इसके पीछे की कहानी भी काफी दिलचस्प है। दरअसल टाटा स्टील में कायर्रत मोहन अहूजा बिहार के जाने-माने बैडमिंटन खिलाड़ी थे, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपने समय में ज़बरदस्त सुर्खियां बटोरी थी। उनकी मौत के बाद इस स्टेडियम का नाम उनके नाम पर रखा गया।

जब विवादों में घिरा स्टेडियम : –

अक्सर धार्मिक जगहों को लेकर विवाद की ख़बरें सामने आती रहती है। ऐसा ही कुछ हाल हुआ झारखण्ड के बैडमिंटन के मक्का, मोहन अहूजा इंडोर स्टेडियम को लेकर। दरअसल जिस जगह पर स्टेडियम बना है, उस जगह को टाटा स्टील ने सब लीज़ पर बैडमिनट एसोसिएशन को दिया था, लेकिन 31 दिसंबर साल 2017 में अनुबंधन की समाप्ति के बाद टाटा स्टील इस जगह पर दोबारा से अपना अधिकार चाहता था, लेकिन राज्य के बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए यह किसी अभिशाप से कम नहीं था। टाटा स्टील के इस फैसले से सैकड़ों खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर लगता नज़र आने लगा। वहीं झारखण्ड बैडमिंटन एसोसिएशन इस लीज़ की अवधि एक बार फिर से बढ़ाने की कवायद में जुटा गया, लेकिन टाटा स्टील, बैडमिंटन एसोसिएशन के इस सपने को तोड़ने पर आमादा था। दोनों संस्थानों के बीच तनातनी का यह मामला कोर्ट पहुंचा और हाल ही में इसे लेकर सुनवाई हुई है। इस मामले पर जल्द ही फैसला आने की उम्मीद की जा रही है।

गुमनामी में जीता स्टेडियम : –

मोहन अहूजा इंडोर स्टेडियम को बैडमिंटन का मक्का इसलिए कहा जाता है ल, क्योंकि झारखण्ड में बैडमिंटन खिलाड़ियों की प्रतिभा को तराशने और मौके देने के लिए इसके अलावा और कोई स्टेडियम नहीं है। बावजूद इसके यह स्टेडियम उम्मीद के अनुरूप चर्चित नहीं है। आज भी, शहर के लोगों से अगर इस स्टेडियम के बारे में पूछा जाए, तो एक बार को वो सोच में पड़ जाएंगे, कि आख़िर ये स्टेडियम है कहाँ! जिस तरह कीनन स्टेडियम की जानकारी बच्चे, बूढ़े, महिलाओं हर किसी के दिमाग में रचा-बसा है, वैसा कुछ भी इस बैडमिंटन स्टेडियम के साथ नहीं है। शहर में बैडमिंटन प्रेमियों की संख्या में कमी भी इस स्टेडियम की गुमनामी का कारण है।

उपलब्धियां : –

झारखण्ड का नाम बीते दिनों सुर्ख़ियों में रहा जब जमशेदपुर के रहने वाले, सचिन कुमार राणा को बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया ने बतौर कोच चुना। राणा उन पांच कोच की टीम का हिस्सा है, जिनपर कुल 22 बैडमिंटन प्लेयर्स (लड़के और लड़कियां) के खेल में बारीकी लाने की ज़िम्मेदारी है। 22 सदस्यीय खिलाड़ियों की यह टीम बैडमिंटन एशिया जूनियर चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए 11 जुलाई को जकार्ता के लिए रवाना होगी। यह चैंपियनशिप 14 से 22 जुलाई 2018 तक आयोजित किया जाएगा। वहीं राणा की अन्य उपलब्धियों की बात करें, तो वे खुद भी 7 बार स्टेट चैंपियन रह चुके हैं और साल 2016 में बैडमिंटन एशिया टीम चैंपियनशिप में सीनियर टीम के मेंटर रह चुके हैं।

वहीं शहर के लिए एक विशेष उपलब्धि यह रही कि झारखण्ड बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव के.प्रभाकर राव को भी हाल ही में बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया ने एक बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी है। वे झारखण्ड बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव तो हैं ही, इसके अलावा उन्हें बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के जॉइंट सेक्रेटरी की ज़िम्मेदारी भी अभी कुछ महीने पहले ही सौंपी गई है।

इसके अलावा बीते महीने बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया की ओर से आयोजित ट्रेनिंग कैंप में जमशेदपुर के 2 खिलाड़ियों और हज़ारीबाग के एक खिलाड़ी ने हिस्सा लिया। जमशेदपुर से लड़कों के 13 साल ऐज ग्रुप में रौनक नेगी, जबकि लड़कियों के 13 साल की ऐज ग्रुप से आद्या सिंह ने इस कैंप में हिस्सा लिया। वहीं हज़ारीबाग़ के जॉय चैटर्जी ने 15 साल के ऐज ग्रुप की श्रेणी में शामिल होकर इस कैंप में हिस्सा लिया।

इतना ही नहीं, बल्कि झारखण्ड बैडमिंटन एसोसिएशन से बेहतर खिलाड़ियों के निकलने की उम्मीद केवल हम झरखण्ड वासी नहीं, बल्कि देश के दिग्गज कोच भी करते हैं। शायद वे जानते हैं, कि झारखण्ड केवल खनिजों के मामले में नहीं बल्कि मेहनत और हुनर के मामले में भी काफी आगे है। इसलिए झारखण्ड बैडमिंटन एसोसिएशन के साल 2018 के एनुअल जनरल मीटिंग में साइना नेहवाल और पीवी सिंधू के गुरु, पुलेला गोपीचन्द ने भी शिरकत की। इस मीटिंग में गोपीचन्द ने झारखण्ड से निकलने वाले खिलाड़ियों के प्रति काफी उम्मीदें भी ज़ाहिर की।

तो ये आर्टिकल था अपने शहर जमशेदपुर के बेहद ख़ास, मोहन अहूजा इंडोर बैडमिनट स्टेडियम के बारे में। इस आर्टिकल में आपने पढ़ा मोहन अहूजा इंडोर स्टेडियम के अनजाने किस्सों के बारे में। किस तरह इस स्टेडियम की शुरुआत हुई, क्यों इसका नाम मोहन अहूजा स्टेडियम रखा गया और किस तरह इस स्टेडियम ने देश को बैडमिंटन के नायाब कोच, ज़िम्मेदार अधिकारी और खिलाड़ी सौंपे। इस स्टेडियम से जुड़े कुछ ख़ास अनजाने,अनछुए और विवादित पहलुओं को दूसरे पार्ट में लेकर जल्द लौटेंगे हम अपने शहरवासियों के बीच।

Written & compiled by Shweta modi

References : –

https://www.telegraphindia.com/states/jharkhand/shuttler-to-mentor-national-squad-237729

https://www.telegraphindia.com/states/jharkhand/state-shuttlers-in-national-camp-229753

https://www.google.co.in/amp/s/m.jagran.com/lite/jharkhand/jamshedpur-mohan-ahuja-stadium-badminton-jharkhand-badminton-association-prabhakar-rao-17616577.html

https://www.google.co.in/amp/s/m.jagran.com/lite/jharkhand/jamshedpur-tata-steel-badmintion-mohan-ahuja-stadium-jrd-tata-sports-complex-17297629.html

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