15 अगस्त, टॉफ़ी और गांव का एक स्कूल


यूँ तो हम सभी अपनी ज़िन्दगी के हर ख़ास दिन को बेहद अच्छे से मनाना चाहते हैं। लेकिन स्वतंत्रता दिवस की बात ही कुछ और होती है। इस दिन की तैयारियां हमारे घर, मोहल्ले या शहर में ही नहीं, बल्कि पूरे देश, यहाँ तक की विदेशों में रहने वाले भारतियों के लिए भी उत्साहित करने वाली होती है। हर साल, इस ख़ास दिन को हर कोई अलग तरह से मानाने के प्रयास में जुटा रहता है।

इसी अलग तरह की सोच से भरी जमशेदपुरटेन्मेंट की टीम ने भी 15 अगस्त के दिन को यादगार बनाने की ठानी। इस टीम को अलग-अलग क्षेत्र में काम करने वाले जमशेदपुरियों ने मिलकर बनाया है। ऐसे में जब तय हुआ कि इस दिन कुछ ख़ास करना है, तो टीम प्लानिंग में जुट चली और आख़िर तय हुआ की आज का दिन नन्हे-मुन्हों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए समर्पित हो।

टीम ने, जमशेदपुर रेलवे स्टेशन से कुछ किलोमीटर दूर, उत्क्रमित मध्य विद्यालय, नांदुप (सुंदरनगर थाना के समीप) जाने का फैसला किया। हम सभी के लिए ये मौका बेहद ख़ास था, क्योंकि आज़ादी के जश्न के बीच, बच्चों के चेहरे पर खिली मुस्कान देखने को हम सभी बेताब थे। इस कार्यक्रम के पहले ही जमशेदपुरटेन्मेंट ने सोशल मीडिया के ज़रिये लोगों से मदद मांगी ताकि, इन बच्चों तक पढ़ाई-लिखाई और खेलकूद का ज़रूरी सामान पहुँच सके।

अपने शहर के लोगों में गज़ब की दिलदारी है, लोगों ने दिल खोलकर किताब-कॉपी ही नहीं बल्कि पढ़ाई में अन्य ज़रूरी सामान, खेल कूद का सामान, यहाँ तक आर्थिक रूप से भी टीम की मदद की। स्कूल में पहुंचकर झंडातोलन के बाद, जब बच्चों के बीच टीम छोटी-मोटी एक्टिविटी करवा कर उन्हें स्टेटिनेरी का सामान भेंट कर रही थी, उस दौरान बच्चों के चेहरे पर खिली मुस्कान, शायद ही किसी और माहौल में किन्ही और बच्चों के साथ देखने को मिले।

जब बच्चे, छुट्टी का दिन और घर भूलकर, आपके साथ पढ़ने-लिखने की बातों में और एक्टिविटीज़ में हिस्सा लें, तो यकीन हो जाता है कि बच्चों को मज़ा आ रहा है। आज का माहौल कुछ ऐसा ही था। उन्हीं बच्चों की भीड़ से निकले कुछ बच्चे फ़ोटो खिंचवाने के लिए पोज़ दे रहे थे, तो कुछ दीदी- भईया को कोने में ले जाकर कह रहे थे, “आपलोग इस बार आए हो, हर साल ऐसे ही आते रहिएगा”। इस पूरी एक्टिविटी ने जितनी ख़ुशी बच्चों को दी, उतनी ही हमारी टीम को भी। इन बच्चों ने हमें एक बार फिर से स्कूल का वो मासूम बच्चा बना दिया! सच है कि असली दुनिया मोबाइल के अंदर नही गांव के इन स्कूल में है जो जरूरी सुख सुविधाओं के बावजूद भी खुश रहने का फार्मूला जानते है, अगर कभी आपको मदद करने का मौका मिले तो गांव के इन स्कूलों में जरूर जाइये।

टीम में अपना खास योगदान अम्बाती रोहित, तरुण कुमार, जयवर्धन, गौतम, अनुराग पांडेय, श्वेता मोदी, अभिषेक, अर्पण , अमरनाथ और मनोज ने दिया

लेखिका- श्वेता मोदी, तस्वीरे – Aevi

जमशेदपुरटेंमेंट

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