नज़र आती चेतावनी को नज़रअंदाज़ क्यों करना ?


जमशेदपुर:- शैक्षणिक संस्थानों के आसपास, ख़ासकर स्कूलों के बाहर एक नोटिस अक्सर हमें नज़र आता है, जिसे हम नज़रअंदाज़ कर देते हैं। पढ़ने में ये बातें अटपटी ज़रूर लग सकती हैं, लेकिन झूठी नहीं है। दरअसल ये नोटिस होते हैं, स्कूल के आसपास तम्बाकू बिक्री के ख़िलाफ़। इसे नोटिस न कहकर सख़्त चेतावनी कहा जा सकता है। बावजूद इसके इस गम्भीर मसले को हल्के में लिया जाता है। केवल तम्बाकू से बने उत्पाद बेचने वाले दुकानदारों द्वारा ही नहीं, बल्कि अभिभावकों, छात्रों और कभी – कभी स्कूल प्रशाशन द्वारा भी।

ऐसी अनदेखी, हमारे बच्चों के भविष्य के लिए घातक साबित होती हैं। कब हमारे घर, परिवार या मोहल्ले में रहने वाला राहुल, अंकित, तेजस, अभिषेक और न जाने कितने ही बच्चे इस तम्बाकू की ज़द में आ जाते हैं, हमें पता ही नहीं चलता। और तब, हमारे पास, किस्मत, भगवान और अपनी परवरिश पर सवाल उठाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचता।

अगर हम इन बातों पर ध्यान दें, स्कूल और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के आसपास, तम्बाकू – पान बेचने वाले गुमटियों का विरोध करें, तो यक़ीनन हालात बदलेंगे। इसके लिए ज़रूरी है कि हम अपने दायरे से बाहर आए। वो दायर जो हमने केवल अपने परिवार और बच्चों के लिए बना रखा है। इस दायरे को ऐसे समझे कि अगर हमारा बच्चा स्कूल जाता है और तम्बाकू का सेवन नहीं करता है, तो स्कूल परिसर के आसपास चाहे तम्बाकू की जितनी ही गुमटियां खुल जाएं, हम उसपर आँखें मूंद लेते हैं!

रिपोर्ट-श्वेता मोदी

तस्वीरें- अंबाती रोहित

What Do you think about this news?

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s