Journal-E-Jamshedpur | Chapter 4


 पेश है जमशेदपुरटेन्मेंट की ख़ास पेशकशJournal-e-Jamshedpur.
इस सेगमेंट में हर शनिवार की रात कहानी का एक टुकड़ा पोस्ट होगा. जो अपने शहर की कहानी है, आपकी और हमारी कहानी है. चलिए शुरू करते हैं…

Journal-E-Jamshedpur | Chapter 3 पढ़ने के लिए यहाँ  क्लिक करें

मेहंदी की ख़ुशबू नशीली होती है क्या, या ये ख़ुशबू किसी और चीज़ की है या ये नशा कोई और सा?

बहरहाल, मैंने इसके बारे में सोचना छोड़ दिया. स्टुडियो जाने से पहले कॉफ़ी पीने को जी चाहा, चॉकलेट वाली… हाँ, उसकी फ़ेवरेट कॉफ़ी. मैंने जेनरल स्टोर से कॉफ़ी के सैशे ख़रीद लिए, और डार्क चॉकलेट भी. इस बार अपने लिए. इस बात से उसे हमेशा नाराज़गी होती थी कि जमशेदपुर में जितने चाय के खोमचे हैं, उतने कॉफ़ी के क्यों नहीं. आदतन उसकी हाँ में हाँ मिला दिया करता.

मैंने पानी गरम कर थर्मस में रख लिया, सोचा आज ऑफ़िस में चाय को कॉफी से बदल दूँ, उसके साथ न सही उसके साथ को महसूस कर सकूं.

 

ऑफिस में प्योन ने चाय को पूछा तो मैंने मना कर दिया. मैंने थर्मस निकाला और सब से छुपछुपा कर मग में चॉकलेट रख दी. कोई भला क्या सोचता? ख़ैर मुझे धक्क से वो क़िस्सा याद आया, हमारी डेट का.

 

हमारे सामने 3 हाथियों का एक झुंड खड़ा था. और हम हाथियों के सामने एक कदम्ब के पेड़ से लगे बैठे थे. कदम्ब के पेड़ से धूप छनती हुई हमारे धूल से लाल हुए चेहरे पर पड़ रही थी, हम ठंड से ठिठुर रहे थे.

 

अबतक उसके कॉफ़ी प्रेम को समझ गया था. हम दलमा पहाड़ पर थे, वैलेन्टाइन्स का दिन था. काफी ठंड थी, हाथ ऐसे जम गए थे मानो ख़ुद दलमा पहाड़ हो. मैंने अपनी बैग से थर्मस निकाला, हमने डार्क चॉकलेट वाली कॉफी बनायी.

अब मैं मुस्कुरा रहा था. हाहा, कैसे भकलोली किया करते थे हम! हाथियों के बीच चॉकलेट कॉफ़ी. मैंने चुपके से चवन्नी मुसकी मार दी.

 

(आगे पढ़ने के लिए इस सेक्शन को फ़ॉलो करते रहें)

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